आखिरकार दिल्ली वालों के दिल का दर्द जुबान पर आ ही गया. जनता के २८,००० करोड़ रूपए फूंक दिए, लूट लिए, पर शर्म नहीं आई. इस पैसे से कितने ग़रीबों की जिंदगी सुधर सकती थी. पर इन भ्रष्ट लोगों को तो अपनी सुधरी जिंदगी और ज्यादा सुधारनी थी. मजदूरों से जानवरों की तरह काम कराया और खुद ऐयाशी की और कर रहे हैं और करेंगे.
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