अब इस में कोई संदेह नहीं रहा कि यह सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाएगी. इस सरकार का हर कार्य नागरिकों के खिलाफ और भ्रष्टाचारियों के पक्ष में होता है. अब जहाँ भी जब भी चुनाव हो, मतदाताओं को इस भ्रष्ट सरकार और इसकी साथी भ्रष्ट पार्टियों को हराना है.

जन लोकपाल बिल को कानून बनाओ, फिर हमसे वोट मांगने आओ, नहीं तो हार के गहरे समुन्दर में डूबने के लिए तैयार हो जाओ.
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Monday, January 03, 2011

क्या इंदिरा गाँधी को भारत रत्न मिलना चाहिए था?

इंदिरा गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चुनावी धांधली के लिए दोषी ठहराया था. इस से नाराज हो कर उन्होंने देश में आपातकाल लगा दिया. इस के लिए उन्होंने न तो अपने मंत्रिमंडल से संपर्क किया, न ही अपने कानून मंत्री और गृहमंत्री से संपर्क किया. राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद से मात्र अपनी सिफारिश पर भारतीय लोकतंत्र का न केवल घोर अपमान किया बल्कि लोकतंत्र को ही अनिश्चितकाल तक निलंबन में रखवा दिया. बाद में लोकतंत्र के इस घोर अपमान को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सही ठहरवा दिया.

अब सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि १९७६ में इमरजेंसी पर उसके एक फैसले से देश की बड़ी आबादी के मूलभूत अधिकारों का हनन हुआ था. जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने एक फैसले में कहा है कि एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला केस (1976) में इमरजेंसी के दौरान मूलभूत अधिकार तात्कालिक तौर पर खत्म करने का जो फैसला पांच सदस्यों वाली संविधान पीठ ने कायम रखा, वह गलत था. जस्टिस गांगुली ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि कोर्ट के बहुमत से लिए गए उस फैसले से देश की बड़ी आबादी के मूलभूत अधिकारों का हनन हुआ था. बहुमत के उस फैसले में जस्टिस खन्ना ने अलग फैसला देते हुए कहा था कि हाई कोर्ट बंदी प्रत्यक्षीकरण पर रिट जारी कर सकता है और यह संविधान का अभिन्न अंग है। संविधान में किसी अथॉरिटी को यह अधिकार नहीं है कि इमरजेंसी के दौरान हाई कोर्ट के इस अधिकार को सस्पेंड कर दे। बाद में जस्टिस खन्ना की उस अलग राय के अनुसार संविधान के 44वें संशोधन के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता को इमरजेंसी के दौरान सस्पेंशन के दायरे से अलग कर दिया गया।

यह सही है कि बाद में इंदिरा गाँधी फिर प्रधान मंत्री बन गईं, पर उनका भारत राष्ट्र, भारतीय लोकतंत्र और भारतीय नागरिकों के खिलाफ
इमरजेंसी के अपमानजनक हथियार का प्रयोग करने का अपराध इतिहास का एक ऐसा हिस्सा है जिसे मिटाया नहीं जा सकता. जब कभी भी इंदिरा गाँधी का नाम लिया जाएगा, उस के साथ इमरजेंसी का नाम भी लिया जाएगा. क्या ऐसे व्यक्ति को भारत का रत्न कहा जाना चाहिए? कभी नहीं. इंदिरा गाँधी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए.